
बिल्सी। चार छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रहे धर्मपाल की पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर तहसील प्रशासन के सामने मामला पहुंचा। धर्मपाल की पत्नी की पहले ही मृत्यु हो चुकी है और उसके बाद चार छोटे बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी उस पर है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, धर्मपाल पर नशा करने और बच्चों के साथ मारपीट करने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं, जिसके चलते बच्चों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
बताया जाता है कि अपनी परेशानी लेकर धर्मपाल जब एसडीएम बिल्सी के पास पहुंचा तो एसडीएम ने उसकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मानवीय आधार पर मदद का प्रयास किया। प्रशासन की ओर से पात्रता के अनुसार विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल की गई। इतना ही नहीं, जरूरत को देखते हुए एसडीएम ने निजी स्तर पर भी आर्थिक सहायता की।
तहसील परिसर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी धर्मपाल की स्थिति को देखते हुए सहयोग किया। सीओ बिल्सी, नायब तहसीलदार, तहसीलदार, पेशकार सहित तहसील परिसर के अन्य कर्मचारियों द्वारा भी अपनी क्षमता के अनुसार उसकी मदद किए जाने की बात सामने आई है।
बताया गया कि एसडीएम की ओर से धर्मपाल को घरेलू उपयोग के लिए गैस सिलेंडर भी उपलब्ध कराया गया, लेकिन आरोप है कि अगले ही दिन उसने सिलेंडर बेच दिया। इसके बाद प्रशासन की ओर से राशन की भी व्यवस्था की गई। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के पालन-पोषण और पढ़ाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन धर्मपाल बार-बार आर्थिक सहायता की मांग करता रहा।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब धर्मपाल देर रात तक एसडीएम से सहायता की मांग करने पहुंचने लगा। स्थिति को देखते हुए एसडीएम ने उसे आवास पर आने से मना करते हुए समझाया कि उपलब्ध सहायता का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, भोजन और जरूरतों को पूरा करने में किया जाए।
इसके बाद धर्मपाल अपनी मांगों को लेकर तहसील परिसर में धरने पर बैठ गया। मामले की जानकारी मिलने पर सीओ बिल्सी मौके पर पहुंचे और धर्मपाल को समझाया। अधिकारियों की समझाइश के बाद वह धरने से हट गया।
- बच्चों के भविष्य को लेकर प्रशासन की चिंता
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात चार छोटे बच्चों का भविष्य है। पत्नी की मृत्यु के बाद बच्चों की जिम्मेदारी धर्मपाल पर है, ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि बच्चों को भोजन, शिक्षा और जरूरी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि सहायता का उद्देश्य बच्चों का भविष्य संवारना है, न कि किसी ऐसी गतिविधि को बढ़ावा देना जिससे बच्चों का नुकसान हो।
स्थानीय स्तर पर एसडीएम बिल्सी की इस पहल की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने केवल सरकारी जिम्मेदारी तक सीमित न रहते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और जरूरतमंद परिवार की मदद के लिए आगे आया। एसडीएम द्वारा निजी स्तर पर भी सहायता किए जाने और तहसील के अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा सहयोग किए जाने को मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बताया जा रहा है।
हालांकि धर्मपाल पर नशा करने और बच्चों के साथ मारपीट जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित विभाग अथवा पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता चारों बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना होना चाहिए।




