विदिशा में शिक्षा का रास्ता या मौत की डगर? उफनते स्टॉप डैम को पार कर स्कूल जाने को मजबूर मासूम
किताबों से पहले बच्चों को सुरक्षित रास्ता चाहिए"

विदिशा (मध्य प्रदेश): शिक्षा के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों रुपये के विज्ञापनों के बीच ज़मीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विदिशा जिले में स्कूली बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते स्टॉप डैम पर छलांग लगाते हुए स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि हर दिन मासूम छात्र-छात्राएं इसी खतरनाक रास्ते से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में स्टॉप डैम का पानी तेज़ बहाव के साथ ऊपर तक भर जाता है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों के लिए कोई सुरक्षित पुल या वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है।
- हर कदम पर मौत का खतरा
ज़रा सोचिए, अगर किसी बच्चे का पैर फिसल जाए या तेज़ बहाव उसे बहा ले जाए, तो उसकी जान का जिम्मेदार कौन होगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? यह सवाल अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पूरे प्रदेश के सामने खड़ा है।
- दावों और हकीकत में बड़ा अंतर
एक ओर सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। सुरक्षित पुल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
- ग्रामीणों में आक्रोश, पुल निर्माण की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित पुल का निर्माण कराने और बच्चों के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।




