
बदायूं।जनपद बदायूं के उघैती थाना क्षेत्र के गांव छिबऊकला में उस समय उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) से सेवानिवृत्त होकर अपने गांव पहुंचे ऋषिपाल सिंह का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया और वर्षों की देश सेवा के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

गांव पहुंचने पर 20 चार पहिया वाहनों तथा बड़ी संख्या में मोटरसाइकिलों का काफिला उनके साथ चला। डीजे और बैंड-बाजों की धुन पर निकली भव्य शोभायात्रा का पूरे गांव में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। परिजन, रिश्तेदार, मित्रों के साथ आसपास के कई गांवों से पहुंचे लोगों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

ऋषिपाल सिंह ने युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश
इस अवसर पर ऋषिपाल सिंह ने युवाओं से कहा कि देश सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, मेहनत और ईमानदारी के साथ सेना व अर्द्धसैनिक बलों की तैयारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और अपने माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान करने की भी अपील की।

उत्सव जैसा रहा माहौल
पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। डीजे की धुन, बैंड-बाजे और लोगों के उत्साह ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। ग्रामीणों ने कहा कि सैनिकों का सम्मान समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है और ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करते हैं।
हर चौराहे पर हुआ स्वागत, फूलों से लाद दिया गया वीर जवान

शोभायात्रा जिस भी मार्ग से गुजरी, वहां लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई स्थानों पर स्वागत द्वार बनाए गए थे, जहां ग्रामीणों ने ऋषिपाल सिंह को फूल-मालाओं से लाद दिया। लोगों ने उनका अभिनंदन करते हुए कहा कि गांव का बेटा वर्षों तक देश की सीमाओं की रक्षा कर सुरक्षित लौटा है, इससे पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
सम्मान ने बढ़ाया सैनिकों का मनोबल

ग्रामीणों ने कहा कि सैनिकों का इस प्रकार सम्मान होने से न केवल देश की सेवा कर रहे जवानों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को भी नई प्रेरणा मिलती है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ी के लिए भी राष्ट्रभक्ति और सम्मान का जीवंत उदाहरण बन गया।
देशभक्ति के रंग में डूबा छिबऊकला
पूरे कार्यक्रम के दौरान छिबऊकला गांव किसी उत्सव स्थल से कम नहीं दिखाई दिया। डीजे की धुन, बैंड-बाजे, वाहनों के काफिले, भारत माता के जयघोष और लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ग्रामीणों ने कहा कि यह सम्मान केवल ऋषिपाल सिंह का नहीं, बल्कि भारत माता की रक्षा करने वाले प्रत्येक सैनिक के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है।



